महात्मा गांधी का जीवन चरित्र - Mahatma Gandhi's information in Hindi





Introduction of Mahatma Gandhi's life, महात्मा गांधी के जीवन का परिचय, Essay on Mahatma Gandhi, महात्मा गांधी पर निबंध, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी :

आज हम इस लेख में मोहनदास करमचंद गांधी उर्फ़ महात्मा गांधीजी के जीवन चरित्र के बारे में जानने वाले है, गांधीजी के जीवन से उनके देहांत तक सभी जानकारी हम आज यहां जानने वाले है।




  • महात्मा गांधी जी की जीवनी (Biography of Mahatma Gandhi)

भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का नाम मोहनदास गांधी, गांधीजी के पिता का नाम करमचंद गांधी और माता का नाम पुतलीबाई था। उनका पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था। महात्मा गांधी एक महान व्यक्ति थे, इसलिए सभी भारतवाशी उन्हें प्यार से बापू बुलाते है।

भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का नाम 2 October 1989 पोरबंदर, गुजरात में हुआ था। गांधीजी के पिता श्री करमचंद गांधी राजकोट के दीवान थे। और माताजी एक दया, भावना तथा धार्मिक विचारों वाली महिला थीं। महात्मा गांधीजी का बचपन माता पिता के साथ गुजरा, बचपन से ही राष्ट्रपिता महात्मा गांधीजी में दया, प्रेम, तथा ईश्वर के प्रति श्रद्धा भाव बचपन में ही जागृत हो चुके थे। 


  • महात्मा गांधीजी का विवाह (Mahatma Gandhiji's marriage)

मोहनदास गांधी उर्फ़ महात्मा गांधीजी का विवाह 13 वर्ष की आयु में ही 14 वर्ष की कस्तूरबा माखनजी से हो गया। अपने बापू जी उनकी पत्नी कस्तूरबा गांधी से १ साल से छोटे थे। उस समय महात्मा गांधीजी की पढाई सुरु थी, उन्होंने अपनी पढाई बरक़रार रखा। 



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  • गांधीजी की आजादी के लिए संघर्ष (The struggle for Gandhiji's independence)

 अब कुछ दिनों बाद में उहोने ने कानून की पढाई सुरु किया, लन्दन से कानून की डिग्री प्राप्त किया। उसके कुछ समय बाद भारत में राजकोट में अपने वकालत का कार्यालय सुरु किया। फिर और कुछ दिन का विदेश सफर और फिर कुछ दिनों बाद उनका भारत आना हुवा। उन्होंने देखा की भारतीयों पर अत्याचार हो रहा है, उन्होंने हो रहे अत्याचार के विरुद्ध प्रश्न उठाया। ब्रिटिश सरकार अपने भारतियों पर अपना हुकुम चला रही थी, भारतियों पर हो रहे अत्याचार को देख कर गांधीजी दंग रह गए।

भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधीजी ने स्वतंत्रता के लिए सदैव सत्य और अहिंसा का मार्ग चुना और आंदोलन किया। गांधीजी ने जिंदगीभर भारत को आज़ादी दिलाने के लिये बहुत संघर्ष किया। और बड़े बड़े वीर सेनानियों के मदद से देश को आझादी दिलाई।

महात्मा गांधीजी ने विदेशी वस्तुओं का बहिस्कार तथा स्वदेसी वसतयों का उपयोग करने के लिए भारतियों को प्रेरित किया। लोगों ने गांधी का साथ दिया और विदेशी वस्तुओं का त्याग करके विदेशी कंपनियों को देश के बाहर भगाया। 



  • महात्मा गांधी जी की हत्या (Gandhiji's assassination)
मोहनदास उर्फ़ महात्मा गांधीजी अपने अतुल्य योगदान के लिये ज्यादातर “राष्ट्रपिता और बापू” के नाम से जाने जाते है। महात्‍मा गांधी सत्य और अहिंसा के पुजारी थे। वह सदैव सत्य और अहिंसा का मार्ग पर चलते रहे। 

फिर कुछ दिनों बाद 30 Jan 1948 को गांधीजी दिल्ली बिरला भवन में थे, उस समय नाथूराम विनायक गोडसे ने गोली मारकर हत्‍या कर दी। फिर कुछ दिनों बाद नवम्बर 1949 में नाथूराम गोडसे तथा उसके  साथीयों को भी फांसी दे दी गयी। 

नाथूराम गोडसे व उसके साथी गांधीजी को दोषी मानते थे, क्योकि आज़ादी के कुछ सालो बाद गांधीजी ने पाकिस्थान को 55 करोड़ रुपये दिए थे। इसीलिए नाथूराम विनायक गोडसे ने गोली मारकर हत्‍या कर दी।

राजघाट, दिल्ली में लाखो लोगों के हाजिरी में उनका अंतिम संस्कार किया गया। महात्मा गांधी की समाधि दिल्ली के राजघाट में है। आज भारत में 30 जनवरी को उनकी याद में शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है। 



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